महिलाओं द्वारा बीज का अंकुरण परीक्षण


कृषि में में बहनों का बहुत बड़ा योगदान होता है. ऐसा देखा गया है कि जहाँ बहनें भी खेती में हाथ बँटाती हैं वहाँ उपज बेहतर होती है. ग्रामीण परिवार खरीफ के मौसम की फसलों की तैयारी में जुट गये हैं ऐसे में सोयाबीन की खेती में अधिक उपज के लिये कृषक बनें यदि निम्ंलिखित बातों पर ध्यान देती हैं तो निश्चित ही बेहतर उपज प्राप्त कर सकेंगी:
1.       गहरी जुताई:
बहनें तीन साल में एक बार किये जानी वाली गहरी जुताई के लिये पर्याप्त राशि जमा करें.
नौतपे के पहले, तीन साल में एक बार गहरी जुताई करवाने के लिये घर में किसान भाई को याद दिलायें और एकत्रित की हुई राशि उन्हें सौपें.
सुनिश्च्त करें की समय पर बगहरी जुताई हो जाये.
2.       अंकुरण परीक्षण के लिये बीज का नमूना कैसे तैयार करें:
·      बीज की बोरी की ऊपरी सतह से पहली मुठ्ठी और सबसे नीचे से पाँचवीं मुठ्ठी बीज निकालें. बीच की सतह से क्रमशः दूसरी, तीसरी और चौथी मुठ्ठी बीज निकालें.
·      इन्हें सूप अथवा थाली में रख कर अच्छी प्रकार से मिला लें.
·      आँख मूंद कर इन बीजों से सौ दाने निकाल लें.
3.       अंकुरण परीक्षण की विधि:
·  इन बीजों को दस दस दानों की दस कतार में गीले जूट के बोरे पर रख दें.
·  ऊपर से एक और गीले जूट के बोरे से ढक दें.
·  इन बोरीयों को सुरक्षित स्थान पर 48 घंटे के लिये रख दें.
·  इन बोरीयों को लगातार गीला रखें.
·  इसके उपरांत ऊपर वाली बोरी को हटाकर:
·  स्वस्थ अंकुरित बीज गिन लें
·  अंकुरित बीजों में से कमजोर अंकुर वाले बीज गिन लें
·  बिना अंकुरित हुए बीज गिन लें
·  कमज़ोर अंकुरों को भी गिन लें
4.       अंकुरण परीक्षण का परिणाम:
·      यदि 100 में से 75 से अधिक दाने स्वस्थ रूप से अंकुरित होते हैं तो 32 किलो सोयाबीन प्रति एकड़ बीज दर रखें.
·      यदि 70 दानों में ही अंकुरण बीच होता है तो बीज दर 5 किलो बढ़ा दें. अर्थात प्रति एकड़ 37 से 40 किलो प्रति एकड़ बीज बोयें.
·      यदि 70 से कम बीज अंकुरित हों तो बीज की छनाई करें तथा बदरंगे अथवा अलग किस्म के दिखने वाले दानों की बिनाई कर अलग करें.
·      अब बीज को उपचारित कर बुवाई करें.
5.       बीज का कल्चर द्वारा उपचार:
बोनी पूर्व 1 एकड़ के बीज का उपचार 3 पैकेट पी.एस.बी (600 ग्राम) तथा 1 पैकेट राईजोबियम (250 ग्राम) कल्चर से उपचारित करें यह उपचार शिशु को पोलियो का टीका लगाने के समान है।
(कृपया अपने ज़िले के क़ृषि विज्ञान क़ेन्द्र से प्राप्त जवाहर कल्चर का ही उपयोग करें.)
6.       फफून्द नाशक द्वारा बीज का उपचार:
फफून्द नाशी दवा 2 ग्राम थीरम + 1 ग्राम बैविस्टीन / किलो बीज की दर से उपचारित करें
7.       बीज का उपचार की विधि:
·  पर्याप्त मात्रा में प्लास्टिक की बोरी में बीज लें.
·  इसमें पानी छींट कर हल्का गीला कर लें.
·  बताई गई मात्रा में फफून्द नाशक डालें.
·  बोरी का मुँह बंद कर दो बहनें दोनों छोरों से बोरी को पकड़ कर ज़ोर से हिलायें.
·  इसके उपरांत बताई गई मात्रा में फिर कल्चर को डालें.
·  बोरी का मुँह बंद कर दो बहनें दोनों छोरों से बोरी को पकड़ कर एक बार फिर ज़ोर से हिलायें.
·  अब बीज को बोने के लिये कृषक भाई को दें.
8.       महिला कृषक बहनों से निवेदन कि वे किसान भाईयों को याद दिलायें कि किसान भाई :
  • सोयाबीन की बोवाई कतार में करें तथा कतार से कतार की दूरी 12 - 14 इंच रखें इस तरह से बोनी के लिये सीड ड्रिल की एक कुसिया को बन्द करें और एक को खुली छोड़ें. और फिर बोनी करें.
  • मेड़ नाली सीड ड्रिल का उपयोग और लाभकारी होगा.
  • दस कतार के बाद एक कतार खाली छोड़ें, इस जगह का इस्तेमाल ऊँचे जूते पहन कर दवाई  छिड़कने के लिये करें।

No comments: