सोयाबीन की खेती हेतु महत्वपूर्ण अनुशंषायें

सोयाबीन खरीफ की प्रमुख फसल हैं जो प्रदेश  के सभी जिलों में प्रमुखता से उगाई जाती है। सोयाबीन प्रदेश  के गौरव के अनुरूप इसकी उत्पादकता में हमारा प्रदेश में अग्रणी है । फसल की उत्पादकता वृद्धि एवं शुद्ध लाभ में बढ़ोतरी के लिये उन्नत कृषि तकनीकी अपनायें जाने की अपेक्षा है ।
1.         उचित जल निकास वाली मध्यम भारी, देामट भूमि उपयुक्त है ।
2.         तीन साल में एक बार खेत की गहरी जुताई अवश्य करें. जिससे खेत में नींदा की समस्या में कमी आयेगी.
4.         आधार खाद के रूप में 20 कि. नत्रजन, 60 किलो स्फुर, 20 कि. पोटाश एवं 20 कि. गंधक प्रति हेक्टेयर अवश्य दें। दो वर्ष के अन्तराल पर 20 कि. जिंक सल्फेट प्रति एकड़ दें ।
5.         ज़िले के लिये उपयुक्त किस्में जे.एस.-93-05, जे.एस 335, जे.एस. 95-60, जे.एस. 90-41, जे.एस. 97-52 एवं एन.आर.सी-12 उन्नत किस्में है ।
6.         बीज के आकार के अनुसार 28 से 30 कि. बीज प्रति एकड़ बोनी के लिये उपयोग करें । जून के अंतिम सप्ताह में बोनी का उपयुक्त समय है ।
7.         14 से 18 इंच कतार से कतार की दूरी रखकर बोनी करें । बोनी के समय ध्यान रखें बीज 2.5-3.0 से.मी. से अधिक गहरा न बोयें. दो बार सीड ड्रिल चलाने के बाद ढाई फुट की जगह छोड़कर सीड ड्रिल से बोनी करें. इस स्थान का उपयोग, ऊँचे जूते (गम्बूट) पहन कर कीटनाशक डालने के लिये करें.
8.         बीज को बोने के पूर्व 100 ग्राम कार्बेन्डाजिम या 120 ग्राम ट्राइकोडरमा प्रति एकड़ के बीज की दर से अवश्य  उपचारित करें ।
9.         फंफूदनाशक से बीज उपचार के पश्चात 5 ग्राम राइजोबियम एवं 5 ग्राम पी.एस.बी. कल्चर प्रति किलो की दर से अवशय उपयोग करें । कल्चर उपचारित बीज की तुरन्त बोनी करें।
10.     सोयाबीन फसल को बोनी के 30-40 दिन तक निन्दाई करें । कुल्पा अथवा डोरा चालाकर खेत साफ रखें । रासायनिक नींदा नियन्त्रण के लिये बोनी के 15-20 दिन की अवस्था पर इमेजाथापर 1.50 किलो प्रति हे. की दर से छिड़काव करें
11.     कीट प्रकोप के जैविक नियन्त्रण के लिये बैवेरिया बेसियाना या बीटी 1 ली. प्रति हे. की दर से छिडकाव करें।
12.     सोयाबीन में मुख्यतः नीलाभृंग, तना मख्खी, चक्रभृंग का प्रकोप होता है, नियन्त्रण के लिये बबेरिया बेसियाना 400 ग्राम या ट्रायजोफॉस 350 मिली प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें ।
13.     सोयाबीन की कटाई पत्तियों के सूखकर झड़ जाने व 10 प्रतिशत फलियों के सूखने पर कर लें, फसल की कटाई पश्चात 2-3 दिन सुखायें । देर से कटाई करने पर फल्लियों के चटकनें की संभावना रहती है  

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