धान की खेती की महत्वपूर्ण अनुशंसायें

1.            प्रदेश के बालाघाट, रीवा, सतना, सीधी, शहडोल, उमरिया, कटनी, जबलपुर, सिवनी, डिंडोरी, मण्डला व पन्ना जिलों के अधिकांश  क्षेत्रों में धान की खेती प्रमुखता से की जाती है, जबकि दमोह, ग्वालियर, नरसिंहपुर, छतरपुर, टीकमगढ़, छिन्दवाडा़, बैतूल, होशंगाबाद व रायसेन जिलों के कुछ सीमित क्षेत्रों में धान की खेती होती है ।
2.            धान की फसल बिना बंधान वाले एवं हल्की बंधान वाले खेत की दशाओं में खेती की जाती है ।
3.            रोपा विधि से खेती के लिये रोपणी बनाकर 8-12 जून तक रोपणी की बुआई करें ताकि समय पर रोपाई कार्य हो सकें । रोपणी में 12-13 कि. बीज प्रति एकड़ बोना चाहिये संकर धान का बीज 6 कि. प्रति एकड़ प्रयोग करें ।
4.            उन्नत किस्मों का प्रयोग करें । अतिशीघ्र पकने वाली किस्में-कलिंगा-3, वंदना 1, शीघ्र पकने वाली - जवाहर धान 201 पूर्णिमा, जे.आर.एच.-5 (संकर), मध्यम समय में पकने वाली - आई.आर.36, आई.आर. 64, पूसा सुंगधा-5, एम.टी.यू.1001, देर से पकने वाली- माहसुरी, सफरी-17, शामला, स्वर्णा का प्रयोग करें ।
5.            धान की सीधी बोनी की दशा में बुआई का कार्य वर्षा आरम्भ होते ही जून मध्य से जुलाई प्रथम सप्ताह तक कर दें । धान की कतार में बेानी करें 20 से.मी. कतार से कतार दूरी रखना चाहिये ।
6.            बोनी के पूर्व 3-4 टन प्रति एकड़ अच्छी सड़ी गोबर की खाद या कम्पोस्ट खाद का उपयोग अवश्य करें । कतार से बोनी वाली धान में 3-4 कि./हे. एजेटोबैक्टर और पी.एस.बी. कल्चर का उपयेाग करें ।
7.            शीघ्र पकने वाली किस्मों में नत्रजन 40, स्फुर 20-30 एवं पोटाश  20, मध्यम अवधि में पकने वाली किस्मों के लिये नत्रजन 80-100, स्फुर 30-40, पोटाश  20-25 तथा देर से पकने वाली किस्मों में नत्रजन 100-120, स्फुर 50-60, पोटाश  30-40 किलो संतुलित उर्वरक दे।
8.            स्फुर, पोटाश  एवं जिंक सल्फेट की पूरी मात्रा बीजू धान में बोवाई तथा रोपाई वाली धान में रोपाई के समय पर देना आवश्यक है । नत्रजन बुवाई के समय न देकर 15-20 दिनांे बाद निंदाई करके या रोपाई के 6-7 दिनों बाद देवें, इसमें नत्रजन उपयेाग की क्षमता बढ़ती है। नत्रजन की मात्रा तीन बराबर भागों में दें, दूसरी मात्रा 35-40 दिन में व तीसरी मात्रा 55-60 दिन की अवस्था में देनी चाहिये ।
9.            सूखे खेत में नत्रजन ना दें, निंदाई के बाद ही नत्रजन देवें। गीले पौधों पर यूरिया छिटककर ना दें, कतार में पौधों के जड़ के पास देवें ।
10.        खेत को नींदा रहित रखें, खड़ी फसल में दो बार 20-25 दिन और 40-45 दिन की अवस्था पर निंदाई अवश्य करें । रासायनिक निंदा नियन्त्रण के लिये ब्युटाक्लोर 1 कि./एकड़ सक्रिय सत्व 500 लि. पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें, 20-25 दिनों तक तक नींदा का नियंत्रण करें.  
11.        धान की पत्ती खाने वाले व तना छेदक कीटों के नियन्त्रण के लिये क्लोरोपायरीफॉस 400 मि.ली. या मिथोमिल 40 एस.पी. 400 ग्राम/एकड की दर से छिडकाव करें ।
12.        धान का प्रमुख झुलसा रोग लगने पर नियन्त्रण हेतु हिनोसान 1 मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिडकाव करें । 

No comments: